न्यू दिल्ली समाचार: राजस्थान की भीषण गर्मी में इसी मिट्टी पर पापड़ तक सेंकने वाले बीएसएफ के जवान रेगिस्तान में जमाव बिन्दु से नीचे पहुंचे तापमान में भी पूरी मुस्तैदी के साथ डटे हैं।
राजस्थान के रेगिस्तान की सूखी सर्दी में हडि्डयां तक अकड़ जाती है। ऐसे मौसम में जवान हाथों में हथियार थामे किसी भी घुसपैठ को नाकाम करने में जुटे है। सूरज ढलने के साथ सर्दी बढ़ना शुरू हो जाती है और रात बारह बजे के बाद बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। सर्दी के मौसम में रात दो से सुबह छह बजे तक की गश्त सबसे अधिक मुश्किल मानी जाती है। इस दौरान रेगिस्तान के अधिकांश सीमा क्षेत्र में तापमान जमाव बिन्दु से नीचे पहुंच गया है।
गर्मी के दिनों में जिस मुरार सीमा चौकी पर जवानों ने गरम मिट्टी पर पापड़ सेंके थे अब वहां न्यूनतम तापमान माइनस 1.5 डिग्री चल रहा है।
इस दौरान जवानों को हथियार तक थामे रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों का कहना है कि हमारे जवान सभी तरह के मौसम में स्वयं को ढाल लेते है। सर्दी-गर्मी में कुछ दिक्कत तो आती ही है।
सर्दी में कोहरा बढ़ने के साथ घुसपैठ की आशंका सबसे अधिक रहती है। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है। अधिकारियों का कहना है कि सर्दी को ध्यान में रख जवानों को सर्दी के बचाव के लिए विशेष प्रकार के विंटर क्लोथिंग मुहैया करवाए गए है।
रात और कोहरे में भी अधिक दूरी तक देखने के लिए विशेष तरह के उपकरण उपलब्ध कराए गए है। बीएसएफ अगले कुछ दिन में आपरेशन सर्द हवा भी शुरू करने जा रहा है। इस अभियान में सीमा पर अतिरिक्त जवान तैनात किए जाएंगे। साथ ही गश्त को बढ़ाया जाएगा ताकि सर्दी के कारण गश्त में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जा सके।
रेगिस्तान में मिट्टी जितना जल्दी गरम होती है उससे कहीं अधिक तेजी से ठंडी भी होना शुरू हो जाती है। मई-जून में सीमा पर मिट्टी का तापमान पचास डिग्री से अधिक पहुंच जाता है। ऐसे में मिट्टी पर कदम रखने में दिक्कत आती है। इसी गरम मिट्टी पर बीएसएफ के जवानों ने पापड़ तक सेंके थे। अब यहीं मिट्टी इतनी ठंडी हो जाती है कि हडि्डयां अकड़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बर्फीले क्षेत्रों की गीली सर्दी की अपेक्षा रेगिस्तान की सूखी सर्दी कहीं अधिक मुश्किल भरी होती है। बर्फ में सर्दी का अहसास चमड़ी पर अधिक होता है जबकि रेगिस्तान की सर्दी हडि्डयों तक अपना असर दिखाती है।
राजस्थान के रेगिस्तान की सूखी सर्दी में हडि्डयां तक अकड़ जाती है। ऐसे मौसम में जवान हाथों में हथियार थामे किसी भी घुसपैठ को नाकाम करने में जुटे है। सूरज ढलने के साथ सर्दी बढ़ना शुरू हो जाती है और रात बारह बजे के बाद बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। सर्दी के मौसम में रात दो से सुबह छह बजे तक की गश्त सबसे अधिक मुश्किल मानी जाती है। इस दौरान रेगिस्तान के अधिकांश सीमा क्षेत्र में तापमान जमाव बिन्दु से नीचे पहुंच गया है।
गर्मी के दिनों में जिस मुरार सीमा चौकी पर जवानों ने गरम मिट्टी पर पापड़ सेंके थे अब वहां न्यूनतम तापमान माइनस 1.5 डिग्री चल रहा है।
इस दौरान जवानों को हथियार तक थामे रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों का कहना है कि हमारे जवान सभी तरह के मौसम में स्वयं को ढाल लेते है। सर्दी-गर्मी में कुछ दिक्कत तो आती ही है।
सर्दी में कोहरा बढ़ने के साथ घुसपैठ की आशंका सबसे अधिक रहती है। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है। अधिकारियों का कहना है कि सर्दी को ध्यान में रख जवानों को सर्दी के बचाव के लिए विशेष प्रकार के विंटर क्लोथिंग मुहैया करवाए गए है।
रात और कोहरे में भी अधिक दूरी तक देखने के लिए विशेष तरह के उपकरण उपलब्ध कराए गए है। बीएसएफ अगले कुछ दिन में आपरेशन सर्द हवा भी शुरू करने जा रहा है। इस अभियान में सीमा पर अतिरिक्त जवान तैनात किए जाएंगे। साथ ही गश्त को बढ़ाया जाएगा ताकि सर्दी के कारण गश्त में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जा सके।
रेगिस्तान में मिट्टी जितना जल्दी गरम होती है उससे कहीं अधिक तेजी से ठंडी भी होना शुरू हो जाती है। मई-जून में सीमा पर मिट्टी का तापमान पचास डिग्री से अधिक पहुंच जाता है। ऐसे में मिट्टी पर कदम रखने में दिक्कत आती है। इसी गरम मिट्टी पर बीएसएफ के जवानों ने पापड़ तक सेंके थे। अब यहीं मिट्टी इतनी ठंडी हो जाती है कि हडि्डयां अकड़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बर्फीले क्षेत्रों की गीली सर्दी की अपेक्षा रेगिस्तान की सूखी सर्दी कहीं अधिक मुश्किल भरी होती है। बर्फ में सर्दी का अहसास चमड़ी पर अधिक होता है जबकि रेगिस्तान की सर्दी हडि्डयों तक अपना असर दिखाती है।
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very sad
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